छत्तीसगढ़ मे सरकार शराब पर मेहरबान,बार लाइसेंस राशि हुई कम, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र मे सरकार विफल, शराब पर मेहरबानी आखिर क्या मजबूरी?
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छत्तीसगढ़ मे सरकार शराब पर मेहरबान,बार लाइसेंस राशि हुई कम, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र मे सरकार विफल, शराब पर मेहरबानी आखिर क्या मजबूरी?

छत्तीसगढ़ में शराब कारोबारियों के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है।आबकारी विभाग के नए आदेश ने साफ कर दिया है कि अब राज्य में बार खोलना पहले से कहीं ज्यादा सस्ता और आसान हो गया है। होटल, रेस्टोरेंट और क्लब संचालकों को सीधी राहत देते हुए लाइसेंस फीस और मिनिमम बैंक गारंटी में भारी कटौती कर दी गई है।

24 लाख की फीस सीधे 18 लाख!

आबकारी आयुक्त कार्यालय से जारी आदेश के मुताबिक, 7 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में अब बार खोलने के लिए 24 लाख नहीं, सिर्फ 18 लाख रुपये चुकाने होंगे। यह छूट एफएल-2(क) और एफएल-3(क) कैटेगरी के बार पर लागू होगी।

क्लबों में भी जश्न, फीस में कटौती

क्लब में बार खोलना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है। पहले जो भारी-भरकम फीस वसूली जाती थी, उसे सीधे कम कर दिया गया है।
इतना ही नहीं, थ्री-स्टार और उससे ऊपर के होटलों की लाइसेंस फीस में भी कटौती कर दी गई है।

बैंक गारंटी भी हुई हल्की

सिर्फ लाइसेंस ही नहीं, सरकार ने सभी बार के लिए तय न्यूनतम बैंक गारंटी में भी बड़ी राहत दे दी है। यानी अब कारोबार शुरू करने में पहले जैसी जेब ढीली करने की जरूरत नहीं।

टाइमिंग वही, नियम वही

हालांकि सरकार ने एक बात साफ रखी है कि बार की टाइमिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्यभर में बार सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक ही चलेंगे।

सस्ती शराब पर सख्ती बरकरार

एफएल-3 और एफएल-4 रैंक के बार में 750 रुपये से कम का क्वार्टर अब भी बैन रहेगा। वहीं एफएल-3 और एफएल-4 को छोड़कर बाकी किसी भी बार में 1140 रुपये से कम कीमत की बोतल नहीं बिकेगी।

सबसे बड़ा धमाका: एयरपोर्ट पर खुलेगा बार!

सरकार का सबसे सनसनीखेज फैसला— 2026-27 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा पर बार खोलने की मंजूरी दी जाएगी। अब हवाई सफर से पहले या बाद में एयरपोर्ट के अंदर ही जाम छलक सकेगा। हालांकि बार वही रेस्टोरेंट खोल सकेगा, जिसके पास एयरपोर्ट अथॉरिटी की एनओसी होगी। रेस्टोरेंट के भीतर खाने या हल्के स्नैक्स के साथ विदेशी शराब परोसी जाएगी।

सवाल भी बड़े

सरकार के इस फैसले ने जहां शराब कारोबारियों में खुशी की लहर दौड़ा दी है, वहीं सवाल भी खड़े हो रहे हैं—क्या यह फैसला राजस्व बढ़ाने की मजबूरी है या शराब को और बढ़ावा देने की तैयारी? एक बात तय है—
छत्तीसगढ़ में अब शराब कारोबार के दिन बहुरने वाले हैं।

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