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छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा सरकारी विज्ञापनों में नेशनल हेराल्ड का मुद्दा,विधायक सुशांत शुक्ला के सवाल पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन में रखी पूरी जानकारी

By bharat mangwani
March 10, 2026 2 Min Read
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रायपुर / बिलासपुर
छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा सरकारी विज्ञापनों में नेशनल हेराल्ड का मुद्दा
विधायक सुशांत शुक्ला के सवाल पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन में रखी पूरी जानकारी
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में राज्य में कुछ पत्र–पत्रिकाओं को दिए गए सरकारी विज्ञापनों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुशांत शुक्ला ने सदन में प्रश्न उठाते हुए वर्ष 2019–20 से 2025–26 के बीच जनसंपर्क विभाग द्वारा नेशनल हेराल्ड, संडे नवजीवन, तथा नवसृजन मैग्जीन को जारी किए गए सरकारी विज्ञापनों और उनकी राशि की विस्तृत जानकारी मांगी।
प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन को बताया कि नेशनल हेराल्ड को पिछले पांच वर्षों में कुल 4 करोड़ 24 लाख रुपये के सरकारी विज्ञापन दिए गए।
मुख्यमंत्री ने वर्षवार जानकारी देते हुए बताया कि —

  • 2019–20: 34 लाख रुपये
  • 2020–21: 58 लाख रुपये
  • 2021–22: 68 लाख रुपये
  • 2022–23: 1 करोड़ 28 लाख रुपये
  • 2023–24: 1 करोड़ 36 लाख रुपये
    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2024–25 और 2025–26 में नेशनल हेराल्ड को कोई विज्ञापन भुगतान नहीं किया गया।
    उन्होंने यह भी बताया कि इसी अवधि में नवसृजन मैगज़ीन को कोई विज्ञापन राशि जारी नहीं की गई, जबकि संडे नवजीवन को लगभग 3 करोड़ 6 लाख रुपये के विज्ञापन जारी किए गए। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि नेशनल हेराल्ड के प्रबंधकर्ता पवन बंसल हैं।
    इस विषय पर पूरक प्रश्न के दौरान वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इन विज्ञापनों को किस नीति के तहत जारी किया गया और क्या किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े प्रकाशनों को सरकारी विज्ञापन दिया जाना उचित है।
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सरकारी विज्ञापन प्रति पृष्ठ लगभग 8 लाख रुपये की दर से जारी किए गए हैं और पूरी प्रक्रिया विज्ञापन नियमावली 2019 के प्रावधानों के तहत की गई है।
    विधानसभा में उठे इस प्रश्न के माध्यम से सरकारी विज्ञापनों के वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही का विषय प्रमुखता से सामने आया।

प्रमुख वक्तव्य
विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा:
“सरकारी विज्ञापन जनता के कर के पैसे से दिए जाते हैं, इसलिए उनका वितरण पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होना चाहिए। सदन के माध्यम से यह जानकारी जनता के सामने आना आवश्यक है।”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा :
“राज्य सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है और सभी विज्ञापन निर्धारित नियमों और विज्ञापन नीति के तहत ही जारी किए जाते हैं।”

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